वैश्विक इक्विटी बाज़ारों में हैलोवीन प्रभाव
सारांश
दस्तावेज़ हैलोवीन प्रभाव का वर्णन करता है—मौसमी इक्विटी टाइमिंग पैटर्न, जिसमें ऐतिहासिक रूप से नवंबर से अप्रैल तक के रिटर्न मई से अक्टूबर तक के रिटर्न से अधिक रहे हैं। इसका मूल नियम साल के सर्दियों वाले आधे हिस्से में वैश्विक इक्विटी में निवेश बनाए रखना और गर्मियों वाले आधे हिस्से में नकदी में जाना है। इसके रूपांतरों में उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के बाज़ारों या चक्रीय और रक्षात्मक शेयरों के बीच निवेश बदलना शामिल है। उद्धृत अंतरराष्ट्रीय शोध में अध्ययन किए गए विकसित और उभरते बाज़ारों में से 36 में 37 यह पैटर्न पाया गया; अन्य शोधपत्र वैश्विक सेक्टर रोटेशन दृष्टिकोण पर चर्चा करते हैं।
प्रस्तावित व्याख्याओं में मौसमी प्रभावकारी विकार से जुड़ी जोखिम-विमुखता में बदलाव और आशावाद का चक्र शामिल हैं, जिसमें निवेशक वर्षांत के करीब आशावान होते हैं और बाद में उनकी उम्मीदें घट जाती हैं। उद्धृत अध्ययन कोई एक भरोसेमंद कारण स्थापित नहीं करते; दस्तावेज़ ज़ोर देता है कि व्यावहारिक उपयोग के लिए शोध का समर्थन ज़रूरी है। इसमें इस तरीके को सीधे हेज के बजाय बाज़ार का समय तय करने वाले ओवरले के रूप में बताया गया है और कहा गया है कि हेजिंग के लिए बदले गए किसी भी रूप की कठोर जाँच होनी चाहिए। इस अंश में प्रदर्शन की पूरी श्रृंखला, लेनदेन लागत का विश्लेषण या मौजूदा सत्यापन नहीं दिया गया है।
मुख्य विचार
- समय-निर्धारण का मूल नियम नवंबर से अप्रैल तक वैश्विक इक्विटी और मई से अक्टूबर तक नकदी रखता है।
- उद्धृत शोध में कई अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में इसी तरह का मौसमी रिटर्न पैटर्न बताया गया है।
- संभावित व्याख्याओं में मौसमी जोखिम-विमुखता में बदलाव और निवेशकों का आशावाद चक्र शामिल हैं।
- साक्ष्य प्रभाव का कारण तय नहीं करते।
- इस तरीके को इक्विटी आवंटन ओवरले बताया गया है; हेजिंग के लिए बदले गए रूपों की कठोर बैकटेस्टिंग ज़रूरी है।
टैग
यह सारांश मूल स्रोत के आधार पर Stratmill के शोध एजेंट ने लिखा है; यह स्रोत की प्रति नहीं है।