कम वोलैटिलिटी वाला शेयर प्रभाव और लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो निर्माण | Stratmill
सारांश
कम वोलैटिलिटी प्रभाव के अनुसार, कम जोखिम वाले शेयर ऊँचे जोखिम वाले शेयरों से बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न देने की प्रवृत्ति रखते हैं। इसे लागू करने का सरल तरीका शेयरों को पिछले साप्ताहिक रिटर्न की वोलैटिलिटी पर रैंक करके दशमांश पोर्टफोलियो बनाना और सबसे कम वोलैटिलिटी वाले समूह को खरीदना है। दस्तावेज़ तीन साल की पिछली अवधि का उपयोग करके मासिक पुनर्संतुलन बताता है। इसमें ऐसा लॉन्ग-शॉर्ट विकल्प भी है जो सबसे कम वोलैटिलिटी वाले दशमांश को खरीदता और सबसे ऊँचे वोलैटिलिटी वाले को बेचता है; साथ ही कहा गया है कि केवल लॉन्ग पोर्टफोलियो लागू करना सरल है।
उद्धृत साक्ष्य में 1968–2005 के अमेरिकी न्यूनतम-वेरिएंस नतीजे, 1986–2006 के लिए वैश्विक कम और ऊँची वोलैटिलिटी अल्फ़ा अंतर तथा अन्य बाज़ारों में इसी तरह के पैटर्न बताने वाले अध्ययन शामिल हैं। प्रस्तावित व्याख्याओं में लीवरेज की सीमाएँ, बेंचमार्क से प्रेरित संस्थागत प्रोत्साहन और लॉटरी जैसी जोखिमभरी परिसंपत्तियों के लिए निवेशकों की माँग शामिल हैं। दस्तावेज़ कहता है कि व्याख्याओं पर बहस जारी है, जिसमें यह सवाल भी शामिल है कि रिटर्न गलत मूल्यांकन दर्शाते हैं या व्यवस्थित जोखिम। रणनीति लोकप्रिय होने पर कम-वोलैटिलिटी वाले शेयर महँगे हो सकते हैं और बाज़ार तनाव में उनका प्रदर्शन कमज़ोर पड़ सकता है। ऐतिहासिक निष्कर्ष भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देते।
मुख्य विचार
- यह रणनीति शेयरों को ऐतिहासिक रिटर्न वोलैटिलिटी के आधार पर रैंक करके सबसे कम वोलैटिलिटी वाले समूह में निवेश करती है।
- वर्णित तरीका तीन साल के साप्ताहिक रिटर्न डेटा का उपयोग करके हर महीने पुनर्संतुलन करता है।
- लॉन्ग-शॉर्ट रूप सबसे ऊँची वोलैटिलिटी वाले समूह में शॉर्ट पोज़िशन जोड़ता है; केवल लॉन्ग रूप लागू करना सरल है।
- दस्तावेज़ में उद्धृत शोध अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय नमूनों में बेहतर जोखिम-समायोजित प्रदर्शन बताता है।
- लीवरेज की सीमाएँ, संस्थागत बेंचमार्क और निवेशकों की पसंद इस प्रभाव की प्रस्तावित व्याख्याएँ हैं।
- लोकप्रियता कम-वोलैटिलिटी शेयरों का मूल्यांकन बढ़ा सकती है और बाज़ार तनाव के दौरान रणनीति को कमज़ोर कर सकती है।
टैग
यह सारांश मूल स्रोत के आधार पर Stratmill के शोध एजेंट ने लिखा है; यह स्रोत की प्रति नहीं है।