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बाज़ार अस्थिरता के स्थायी स्रोत: रुझान-अनुसरण और आर्बिट्राज

लेख arXiv papers · लेखक: Jean-Philippe Bouchaud et al.

सारांश

यह दस्तावेज़ पूछता है कि लगभग दो शताब्दियों में परिसंपत्ति-मूल्य का व्यवहार बहुत कम क्यों बदला हुआ दिखाई देता है। इसमें बड़े मूल्य उतार-चढ़ाव और बाज़ार की अक्षमता के दौरों के ऐतिहासिक साक्ष्य दिए गए हैं, फिर रुझान-अनुसरण पर सैद्धांतिक कार्य और तंत्रिका-विज्ञान संबंधी व्याख्याओं की संक्षिप्त समीक्षा की गई है। यह एक वैचारिक व्याख्या प्रस्तुत करता है कि ये पैटर्न अलग-अलग युगों में क्यों बने रह सकते हैं।

प्रस्तावित व्याख्या में रुझानों का अनुसरण करने की सहज मानवीय प्रवृत्ति और दिखाई देने वाले आर्बिट्राज अवसरों का लाभ उठाने के व्यापक प्रयास शामिल हैं। ये व्यवहार मिलकर कीमतों में अस्थिरकारी प्रतिपुष्टि चक्र बना सकते हैं। यह अंश ऐतिहासिक समीक्षा और पिछले शोध पर आधारित तर्क प्रस्तुत करता है; इसमें नए माप नहीं हैं, तंत्रों के सापेक्ष महत्त्व का परिमाण नहीं बताया गया है और कोई ट्रेडिंग रणनीति निर्दिष्ट नहीं है। इसलिए उपलब्ध सामग्री में यह दावा प्रदर्शित कारणात्मक परिणाम के बजाय एक व्यापक व्याख्यात्मक परिकल्पना है।

मुख्य विचार

  • लेखक लंबी ऐतिहासिक अवधि में बड़े उतार-चढ़ाव और बाज़ार अक्षमता के साक्ष्यों की समीक्षा करते हैं।
  • वे रुझान-अनुसरण को एक स्थायी मानवीय प्रवृत्ति मानते हैं, जो मूल्य गतिशीलता को आकार दे सकती है।
  • पहचाने जा सकने वाले आर्बिट्राज का लाभ उठाने के सामूहिक प्रयास अस्थिरकारी प्रतिपुष्टि चक्रों में योगदान दे सकते हैं।
  • व्याख्या व्यवहारगत और बाज़ार तंत्रों को जोड़ती है, लेकिन अंश में उनके प्रभावों का परिमाण नहीं बताती।
  • दस्तावेज़ नई अनुभवजन्य जाँच या ट्रेडिंग रणनीति के बजाय वैचारिक व्याख्या प्रस्तुत करता है।

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पूरा पाठ
# Why have asset price properties changed so little in 200 years


# Why have asset price properties changed so little in 200 years









We first review empirical evidence that asset prices have had episodes of large fluctuations and been inefficient for at least 200 years. We briefly review recent theoretical results as well as the neurological basis of trend following and finally argue that these asset price properties can be attributed to two fundamental mechanisms that have not changed for many centuries: an innate preference for trend following and the collective tendency to exploit as much as possible detectable price arbitrage, which leads to destabilizing feedback loops.

स्रोत के लाइसेंस के तहत श्रेय सहित पूरा पाठ दिखाया गया है। लाइसेंस: abstract CC0

यह सारांश मूल स्रोत के आधार पर Stratmill के शोध एजेंट ने लिखा है; यह स्रोत की प्रति नहीं है।